आज के चर्चित करने वाले मुख्य टॉपिक ( सत्येन्द्र नाथ बॉस का जन्म कहा हुआ,सत्येन्द्र नाथ बॉस की शिक्षा के बारे मे,सत्येन्द्र नाथ बॉस के Parents,सत्येन्द्र नाथ बॉस का कैरियर,सत्येन्द्र नाथ अपने जीवन काल मे क्या - क्या किया,सत्येन्द्र नाथ बॉस की मृत्यु केसे हुई,सत्येन्द्र नाथ बॉस को Nobel पुरुषकार क्यो नहीं मिला ) है
सत्येन्द्र नाथ बॉस का जन्म कहा हुआ ( Parents )
सत्येन्द्र नाथ बोस का जन्म 1 जनवरी 1894 को कोलकाता शहर में हुआ था। उनके पिता नाम सुरेन्द्र नाथ बोस था। सत्येन्द्र नाथ बॉस के पिता ईस्ट इंडिया रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग में कार्य करते थे। सत्येन्द्र नाथ बॉस के अपने सात भाई बहन थे। सत्येन्द्र अपने सात भाइयों-बहनों में सबसे बड़े थे।
सत्येन्द्र नाथ बोस की शिक्षा ( Satendra Singh Education )
उनकी शुरू की शिक्षा उनके घर के पास ही एक सामान्य स्कूल में हुई थी। उसके बाद उन्होंने न्यू इंडियन स्कूल में दाखिला करवाया और फिर कुछ वर्ष के बाद हिंदू स्कूल में दाखिला लिया। अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता के प्रसिद्ध प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। उनके बारे में एक दिलचस्प बात ये है की वो अपनी सभी परीक्षाओं में ज्यादा अंक लाते थे और उन्हें प्रथम स्थान मिलता था। उनकी इस प्रतिभा को देख लोग अक्सर ये कहते थे की वो आगे जाकर बड़े गणितग्य या महान वैज्ञानिक बनेंगे।
सत्येंद्र ने वर्ष 1915 में एम.एस.सी. गणित परीक्षा में प्रथम श्रेणी में सर्वप्रथम आकर उत्तीर्ण की। कॉलेज के प्रिंसिपल सर आशुतोष मुख़र्जी ने उनकी प्रतिभा को पहले से जानते थे। और सर्वप्रथम आने के बाद सत्येन्द्र के प्रिंसिपल ने बिना कुछ सोचे सत्येन्द्र नाथ को फिजिक्स के प्राध्यापक के पद पर नियुक्त कर दिया। सत्येन्द्र ने इस पद पर 5 वर्ष तक काम किया।
सन 1916 से लेकर 1921 तक। उसके बाद वे 1921 में नव स्थापित ढाका विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग में लेकचार्रर के तौर पर शामिल हुए। ढाका विश्वविद्यालय में लेक्चरर का पद ज्वाइन करने के बाद उन्होंने भौतिकी तथा गणित के क्षेत्र में बहुत महत्वूर्ण कार्य किया। वह समय भौतिक विज्ञानं में नई-नई खोजों का था।
जर्मनी के भौतिकशास्त्री मैक्स प्लैंक ने क्वांटम सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। उसके बाद जर्मनी में ही अल्बर्ट आइंस्टीन ने सापेक्षता का सिद्धांत प्रतिपादित किया था। सत्येन्द्रनाथ बोस इन सभी खोजों पर अध्ययन और अनुसन्धान कर रहे थे। उसके बाद भी लगातार कुछ नए खोज के लिए लिए अध्ययन में लगे हुवे थे।

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